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जुग कौ जादू चल गऔ भौजी / महेश कटारे सुगम

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जुग कौ जादू चल गऔ भौजी ।
अब तौ समऔ बदल गऔ भौजी ।

मान्स पौंच गऔ आज चाँद पै,
अब ईशुर तक हल गऔ भौजी ।

जोंन दौड़ में पाछें रै गऔ,
समझौ बौई कुचल गऔ भौजी ।

बुरये बखत नें सबखौं पेरौ,
कोउ-कोउ खौं फल गऔ भौजी ।

लालच ऐसी बुरई बला है,
सूद के संग असल गऔ भौजी ।