भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जुध दर जुध / मनोज पुरोहित ‘अनंत’

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

म्है
जद बी सोचूं
भेजै में चालै
जुध दर जुध
म्हारै अर म्हारै सोच में
कदै ई
आडा आवै सिद्धांत
कदै ई मनगत
कदै ई दुनियादारी

म्हैं तो
हरमेस ई हार्यो
कदैई मन आगै
कदैई दुनियां आगै।
आज ठाह पड़ी
भोत दोरो है जीवणों
आपरी सोच साथै
आपरै ई लोगां बिचाळै।