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जेठ-असाढ रो तावड़ो / सांवर दइया

निसरमो सूरज
बादळां रा पूर-पल्ला
नाख’र
उघाड़ो हुय’र
जोर-जोर सूं हंसण लाग्यो
सड़कां माथै डाम्बर
पिघळण लाग्यो ।