भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

जेमन बैठे जनक जू के द्वारे / बुन्देली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

जेमन बैठे जनक जू के द्वारे,
दशरथ ले कें बरात मोरे लाल
चांदी के पाटा बैठन के लाने,
अंगना में आसन लगाये मोरे लाल।
सोने की झाड़ी गंगाजल पानी,
पीवें के लाने भराये मोरे लाल
पतरी और दोनों में सोने की सींकें
राजा जनक लगाये मोरे लाल
रुच-रुच कर भोजन परोसे जनक जी,
हँस-हँस करें जेवनार मोरे लाल।
छतों अटारी महलों में अपने
सीता की सखियों की भीड़ मोरे लाल।
सारी और सरहज गारी गावें,
महलन बीच उछाह मोरे लाल। जेमन...