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जो करुणाकर तुम्हारा ब्रज में फिर अवतार हो जाए / बिन्दु जी

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जो करुणाकर तुम्हारा ब्रज में फिर अवतार हो जाए।
तो भक्तों का चमन उजड़ा हुआ गुलजार हो जाए।
ग़रीबों को उठा ले सांवले गर अपने हाथों से।
तो इसमें शक नहीं दीनों का जीर्णोद्धार हो जाए।
लुटा कर दिल जो बैठे हैं वो रो-रोकर ये कहते हैं।
किसी सूरत से सुंदर श्याम का दीदार हो जाए॥
बजा दो रस-मयी अनुराग कि वह बाँसुरी अपनी।
कि जिसकी तान का हर तन में पैदा तार हो जाए॥
पड़ी भवसिन्धु में दोनों दृग ‘बिन्दु’ की नैया।
कन्हैया तुम सहारा दो तो बेड़ा पार हो जाए॥