भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

जो दिखता है / सुधेश

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जो दिखता है
वह बिकता है

जो बिकता है
वह छपता है

जो छपता है गाया जाता
जो गाया जाता
इक दिन लोकगीत बन जाता है

जो लोकगीत
मन मन मे बस जाता है

जो मन में बसता
पत्थर भी प्रभु हो जाता है।