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जो मिला तुमसे तुम्हें ही हम नज़र करते रहे / रंजना वर्मा
Kavita Kosh से
जो मिला तुमसे तुम्हें ही हम नज़र करते रहे।
मुफ़लिसी से सीख ले जीवन बसर करते रहे॥
जिंदगी तो बन गयी इक दर्द का दरिया मगर
दर्द को दिल में छुपा कर हम गुज़र करते रहे॥
सब लगे अपने पराया कौन जाना ही नहीं
हर अजाने राहजन को राहबर करते रहे॥
यूँ तो पुरखों ने हमे भी था दिया इक आशियाँ
वक्त के तूफान लेकिन दर ब दर करते रहे॥
मुश्किलों का दौर हर हँस कर किनारे कर दिया
है जुदा यह बात ग़म दिल पर असर करते रहे॥
पत्थरों से और ख़ारों से भरी थी राह हर
मान उनको फूल तय अपना सफ़र करते रहे॥
कर लिया बेलौस मन को पीर के एहसास से
प्यार से हर खूबसूरत रहगुज़र करते रहे॥