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जौने दिना राम जनमे में हैं / बघेली

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बघेली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

जौने दिना राम जनम में है
धरती अनंद भई-धरती अनंद भई हैं हो
गउवन लुटि भई-गउवन लुटि भई हो
आवा गउवन के नाते एक कपिला
रमइयां मुंह दुध पियें- रमइया मुंह दुध पिये हो
जौने दिना राम जनम भे हैं
सोनवन लुटि भई- सोनवन लुटि भई हो
सोनवा के नाते एक बेसरिया
कौशिला नाके सोहै- कौशिला नाके सोहइ हो
जौने दिना राम जनम भे हैं राम जनम भे हैं हो
रूपवन लुटि भई- रूपवन लुटि भई हो
आवा रूपवा के नाते जेहरिया कौशिला पायें सोहै
कौशिला पायें सोहइं हो
जौने दिना राम जनम भे हैं हो
कपड़न लुटि भई कपड़न लुटि भई हैं हो
आवा कपड़ा के नाते पितम्बर
रमइया तन सोहईं- रमइयां तन सोहई हो
जौने दिना राम जनम भे हैं हो
भड़वन लुटि भईं- भड़वन लुटि भईं हो
आवा भड़वा के नाते करोलवा
रमइया हाथ पानी पियें- रमइया हाथ पानी पियें हो।
जौने दिना राम जनम भे हैं हो- राम जनम भे हैं हो
हथियन लुटि भईं- हथियन लुटि भईं हो
आवा हथिया के नाते करहुला रामइया द्वारे झूमईं
रमइया द्वारे झूमड़ हो
जौने दिना राम जनम भे हैं हो
घोड़वन लुटि भई-घोड़वन लुटि भई हो
आवा घोड़वा के नाते-बछेड़वा रमइया द्वारे नाचड़
रमइयां द्वारे नाचई हो।