भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

झबला / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

छोटे-से भैया का छोटा-सा झबला।

झबले को अम्माँ ने घर पर बनाया,
झबले में गोटा सुनहरा लगाया,
झबले को भैया पर खूब सजाया,

छोटे-से भैया का छोटा-सा झबला।

झबला हुआ मैला, धोया-धुलाया,
छत पर लगी अलगनी पर सुखाया,
छत पर सुखाकर फिर खाना बनाया,

छोटे-से भैया का छोटा-सा झबला।

तेज हवा का तभी झोंका आया,
झबले को झटके से ऊपर उड़ाया,
झबले ने घर-घर का चक्कर लगाया,
झबला उड़ा तो फिर वापस न आया।

छोटे-से भैया का छोटा-सा झबला।