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झलरिया मोरी उलरू झलरिया / बघेली

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बघेली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

झलरिया मोरी उलरू झलरिया मोरी झुलरू
झलरिया शिर झुकइं लिलार
अंगन मोरे झाल विरवा
सभवा मा बैठे हैं बाबा कउन सिंह
गोदी बइठे नतिया अरज करैं लाग
हो बव्बा झलरिया मोरी उलरू झलरिया मोरी झुलरू
झलरिया शिर झुकइं लिलार
नतिया से बव्बा अरज सुनावन लाग
सुना भइया आवें देउ बसंत बहार
झलरिया हम देबइ मुड़ाय
फुफुवा जो अइहैं मोहर पांच देबई
झलरिया शिर देबइ मुड़ाय
सभवा भा बैइठे हैं दाऊ कउन सिंह
गोदी बैठे बेटा अरज करैं लाग
झलरिया मोरी उलरू झलरिया मोरी झुलरू
झलरिया शिर झुकइं लिलार
दाऊ मोरी झलरी देउ मोराय
बेटा से दाऊ अरज करैं लाग
आवइं देउ बेटा बसंत बहार
फुफवा जो अइहै करनफूल देबइ
झलरी शिर देबइ मुड़ाय
सभवा में बैयठे हैं कक्का कउन सिंह
बेटा अरज करइं लाग
झलरिया मोरी उलरू झलरिया मोरी झुलरू
झलरिया शिर झुकइं लिलार
कक्का झलरी मोर देअ मौराय
बेटा से कक्का अरज करइं लाग
सुना बेटा बात हमार
बेटा आवइ देउ बसंत बहार
फुफुवा जो अइहें जेहर दइ देबइ
झलरिया शिर देबइ मुड़ाय