भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

झाळ झपकऽ बिन्दी चमकऽ बोलऽ अमृत वाणी / निमाड़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

झाळ झपकऽ, बिन्दी चमकऽ बोलऽ अमृत वाणी,
धणियेर आंगणऽ कुआ खणाया, हरिया एतरो पाणी,
जूड़ो छोड़ी न्हावण बठ्या, धणियेर घर की राणी,
धणियेर घर की राणी रनुबाई, बोलऽ अमृत वाणी।
आमुलड़ा री डाल म्हारी माता, सालुड़ो सुखाड़ऽ,
सालुड़ा रा रम्मक झम्मक, नाचऽ ठम्मक ठम्मक,
धणियेर घर की राणी रनुबाई, बोलऽ अमृत वाणी।