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झिलमिल करती मन में नन्हीं अनुराग कनी / रंजना वर्मा

झिलमिल करती उर में नन्हीं अनुराग-कनी।
जीवन की अभिलाषा दुखियों का भाग बनी॥

क्रिसमस तरु सुमन शेष पंखुरियाँ मुरझाईं
उपवन में उग आये कितने ही नागफनी॥

प्राणों के अमृत से सींचे थे जो अंकुर
उनसे हैं आ लिपटीं हिंसाएँ आगजनी॥

करुण कन्त क्रोड पड़ी बन बैठी करुण कथा
जितनी थी रागनियाँ प्रीति-रीति-राग सनी॥

सुमन शीश दिए मिले नीरस फूलों के तन
फिर हैं सराहते अभावों के भाग धनी॥