भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

झूठे ई बनमाली / मथुरा नाथ सिंह 'रानीपुरी'

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जे परजीवी रस चूसै छै
की करतै रखवाली
हड़पी-हड़पी भोग लगावै
बैठी करै जुगाली।

लाज लगै नै डर लागै छै
पीटै हरदम ताली
चाहे केकर्हौ दूध मिलै नै
अपन्हैं खाय छै छाली।

फूल तोड़ि जे बाग उजारै
सबके नजरें जाली
रक्षक रे जहाँ बनै नित भक्षक
झूठे ऊ वनमाली