भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

झूलना मऽ झूलय बारा रे / पँवारी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पँवारी लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

झूलना मऽ झूलय बारा रे
हुडु...हडु
पारना पअ् डालय वाड्या लगय रमुक
गाई...बारा की गाई...गाई
बारा खऽ कहाँ ते बिलमाऊ
फूल चमेली को देऊ
हडु....हडु