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टटात परछाईं / विश्वरंजन

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अउरो सब मौसम त दोसरा के नाम बा
बाकिर, अँसुआइल जे, ऊहे हमार ह।
अइसन अन्हरिया चितकबरी बा आँखि में
बासमती चाँदनी उबीछ दीं त कइसे
सूखल बबूल के टटात परछाईं हम
बास उड़ल फुलवा के लाश पड़ल जइसे
गदराइल बेरा त तोहरे दुआर बा
डेउढ़ी विदुराइल जे, ऊहे हमार ह।
सपना के रात बड़ा साजल जे रहे मीत
ईथर के अइसन उड़ गइल बिना कहले
कोढ़िया के काया जस आगे के दिन लागे
सगरे संसार अब लउकेला ढहले
दुनिया में देखे के राग-रंग केतना बा
दर्द से रंगाइल जे, ऊहे हमार ह।