भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

टूट कर जाता बिखर गर हौसला होता नहीं / डी. एम. मिश्र

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

टूट कर जाता बिखर गर हौसला होता नहीं
क्यों यक़ीं होने लगा कोई ख़ुदा होता नहीं

आदमी ही आदमी के काम आता दोस्तो
आदमी से बढ़ के कोई दूसरा होता नहीं

राम, रावन सब इसी दुनिया में आ कर के बनें
जन्म से इन्साँ कोई अच्छा, बुरा होता नहीं

चार पल के वास्ते बेशक किसी को हो ग़ुरूर
धन जमा करके बशर कोई बड़ा होता नहीं

क्या अहमियत प्यार की है, क्या ज़रूरत है तेरी
क्या पता चलता अगर तुझसे ज़ुदा होता नहीं

देर से आई समझ में बात यह लेकिन मेरे
बावफ़ा होता जो मैं वो बेवफ़ा होता नहीं