टेलीवीजन हर घरां देखे नंगा नाच,
आगी लागी सब जगह क्यूं न लगेगी आंच।
क्यूं न लगेगी आंच जलेगें जल जायेगें,
सुबह नही तो शाम गर्त में सब जायेगें।
न्याय नीति मर्याद सब तोडें मूरख लोग,
औषध क्या शिवदीन अब बाढ़ि रहा भव रोग।
राम गुण गायरे।
टेलीवीजन हर घरां देखे नंगा नाच,
आगी लागी सब जगह क्यूं न लगेगी आंच।
क्यूं न लगेगी आंच जलेगें जल जायेगें,
सुबह नही तो शाम गर्त में सब जायेगें।
न्याय नीति मर्याद सब तोडें मूरख लोग,
औषध क्या शिवदीन अब बाढ़ि रहा भव रोग।
राम गुण गायरे।