भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ठुकराओ अब कि प्यार करो मैं नशे में हूँ / शाहिद कबीर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ठुकराओ अब कि प्यार करो मैं नशे में हूँ
जो चाहो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ

अब भी दिला रहा हूँ यक़ीन-ए-वफ़ा मगर
मेरा न ए‘तिबार करो मैं नशे में हूँ

अब तुम को इख़्तियार है ऐ अहल-ए-कारवाँ
जो राह इख़्तियार करो मैं नशे में हूँ

गिरने दो तुम मुझे मिरा साग़र संभाल लो
इतना तो मेरे यार मैं नशे में हूँ

अपनी जिसे नहीं उसे ‘शाहिद’ की क्या ख़बर
तुम उस का इंतिज़ार करो मैं नशे में हूँ