शहर से होकर आए हो पर
रहे वही के वही गंवार
थक गयी ताक ताक कर अँखियाँ
तुम पत्थर क्या समझो प्यार !
पढ़ने लिखने में डूबे तुम
क्या समझोगे पीड़ पराई
जल जाए सौतन किताब यह
ठेंगे पर तेरी कविताई !!
शहर से होकर आए हो पर
रहे वही के वही गंवार
थक गयी ताक ताक कर अँखियाँ
तुम पत्थर क्या समझो प्यार !
पढ़ने लिखने में डूबे तुम
क्या समझोगे पीड़ पराई
जल जाए सौतन किताब यह
ठेंगे पर तेरी कविताई !!