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डरौंण्याँ / तोताराम ढौंडियाल 'जिग्यांसु'

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हल्वड़्या जी! मीं न मारा!
जमना बदल्गीं!
सौला; अब दिवाल उगड़ण सीकिगीं! समणि-समणि म् अल्लु खांण गीज्गीं
"हे सर्करि बांणा! भूको ह्वैलो! ले तूबि खैले!
कुतगलि दे-देकि; मीं गिलन्दीं
अर् म्यारै गिच्चा जनैं दिखै-दिखैकि; खूब भक्वर्दीं!
मीं न मारा! जमनैं बदल्गीं!