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डर तो मुझे किसका है के मैं कुछ नहीं कहता / मोमिन

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डर तो मुझे किसका है के मैं कुछ नहीं कहता|
पर हाल ये अफ़्शाँ है के मैं कुछ नहीं कहता|

नासेह ये गिला है के मैं कुछ नहीं कहता,
तू कब मेरी सुनता है के मैं कुछ नहीं कहता|

कुछ ग़ैर से होंठों में कहे है जो पूछो,
तो वहीं मुकरता है के मैं कुछ नहीं कहता|

नासेह को जो चाहूँ तो अभी ठीक बना दूँ,
पर ख़ौफ़ ख़ुदा का है के मैं कुछ नहीं कहता|

चुपके से तेरे मिलने का घर वालों में तेरे,
इस वास्ते चर्चा है के मैं कुछ नहीं कहता|

ऐ चारागरो क़बिल-ए-दरमाँ नहीं ये दर्द,
वर्ना मुझे सौदा है के मैं कुछ नहीं कहता|

हर वक़्त है दुश्नाम हर एक बात पे ताना,
फिर इस पे भी कहता है के मैं कुछ नहीं कहता|

"मोमिन" बा-ख़ुदा सिहर बयानी का जभी तक,
हर एक को दावा है के मैं कुछ नहीं कहता|