भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

डूब गया सूरज / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

रात के समुन्दर में
डूब गया सूरज
डुब्ब...डुब्ब...डुब्ब !
डुब्ब...डुब्ब...डुब्ब !

ऊँची पहाड़ी को चढ़कर था आया
पूरब से पच्छिम का चक्कर लगाया
चक्कर ही चक्कर में
डूब गया सूरज
डुब्ब...डुब्ब...डुब्ब !
डुब्ब...डुब्ब...डुब्ब !

केसर के रंगमें, काजल के रंग में,
चित्र बनाए कितने किरणों के संग में,
थक कर फिर पल भर में
डूब गया सूरज
डुब्ब...डुब्ब...डुब्ब !
डुब्ब...डुब्ब...डुब्ब !