तकलीफ़ का कोई पड़ाव नहीं
न प्रेम। न व्यस्तता। न यात्रा। न इतवार।
लगातार बह रही ज्यों कोई
अग्नि-नदी
समय के भीतर। बस, चुपचाप।
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