भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तत्ता है / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

खाली अपना पिट्टा है।
भूख से हालत खस्ता है।
ऊँ...ऊँ दुद्धू पिऊँ तो कैसे?
दुद्धू तत्ता...तत्ता है।

मम्मी भी हैं पास नहीं।
पापा भी हैं गए कहीं।
भूखा रहना होगा अब तो-
ऐसा मुझको लगता है।

सूरज सिर पर चढ़ आया।
रोने को मन कर आया।
रो भी दूँ तो कौन सुनेगा,
किसको मेरी चिंता है?