Last modified on 5 जनवरी 2009, at 14:01

तब एक कविता लिखी गई होगी / शरद बिलौरे

तब
रात्रि के देवता ने करवट ली होगी
और आसमान में
एक साथ हिनहिनाए होंगे
चाँदी के घोड़े

तब
एक बैल शरीर झटक कर खड़ा हो गया होगा
और एक ने
सिर्फ़ हवा को सूँघ कर ही
गरदन नीची कर दी होगी
तब एक चूल्हा धुंधुआया होगा
और एक लकड़ी
मुँह बिदकाए बिना गुटक गई होगी
लोहे का कसैला स्वाद

तब
एक बीज ज़मीन के भीतर तक गया होगा
और एक सपना अँकुराया होगा
नींद से एकदम बाहर

तब एक आदमी ने आकाश की तरफ़ देखा होगा
और एक औरत
धरती में छुपा आई होगी
अपने बालों का मैल

तब
एक कविता लिखी गई होगी
एक कौआ उड़ा होगा
और एक गाय की पीली दाढ़ में
भर गया होगा
नरम घास का रस।