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तहे-शुऊर में उल्टे सभी हिसाब हुए / रवि सिन्हा

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तहे-शुऊर[1] में उल्टे सभी हिसाब हुए
भली भली सी नसीहत से हम ख़राब हुए

लिखा तो साथ ही था हम ने एक दूजे को
हमीं तमाम हुए आप ही किताब हुए

अगर समेट भी लें ख़ुद को अब तो क्या हासिल
कभी बिखर के भी हम उनको बाज़याब[2] हुए

किसी भी सम्त[3] चले वापसी ख़ुदी पे हुई
मगर हरेक दफ़ा ख़ुद से बे-नक़ाब हुए

किसी मुरीद[4] से सीखेंगे सब वली[5] मुर्शिद[6]
नई मशीन के असरारे-नौ[7] निसाब[8] हुए

कहाँ है दह्र[9] का नक़्शा किधर है राहे-बहिश्त[10]
यहाँ फ़रीक़[11] में झगड़ों के इन्क़लाब हुए

कहीं ज़रूर कोई मुल्क मर रहा होगा
फ़लक[12] पे हिर्सो-हवस[13] उड़ रहे उक़ाब[14] हुए

ज़मीं पे संगे-नहूसत[15] कहाँ से बरसे हैं
ख़ला[16] को ताकिये बैठे वहाँ जनाब हुए

ये मोमिनों[17] की जो दुनिया उजाड़ रक्खी है
चलो अल्लाह मियाँ कुछ तो कामयाब हुए

शब्दार्थ
  1. अवचेतन (subconscious)
  2. पुनः प्राप्त (retrieved)
  3. तरफ़ (towards)
  4. शिष्य (disciple)
  5. महात्मा (saint)
  6. शिक्षक (teacher)
  7. नए रहस्य (new mysteries)
  8. पाठ्यक्रम (curriculum)
  9. युग, काल (era)
  10. स्वर्ग का रास्ता (road to paradise)
  11. दल के सदस्य (members (of a party))
  12. आसमान (sky)
  13. लालच और हवस (greed and lust)
  14. गिद्ध (falcon)
  15. आपदा के पत्थर (stones of misfortune)
  16. शून्य, अन्तरिक्ष (space)
  17. आस्थावानों (believers)