भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ताबूत की आख़िरी कील / नील कमल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पीछे मुड़ कर
देखना भी
ज़रूरी होता है
जब कहीं नज़र न आती हो
आगे की राह

पत्तों का झरना
फूलों का मुरझा जाना
और
रास्ते में खाई
ठोकरों को याद करना भी
मुनासिब होता है कभी-कभी,

सोनार की सौ मार के बाद
लोहार का एक वार भी
ज़रूरी होता है

मेरे पीछे एक रात है ,लम्बी,
आगे छटपटाती सुबह,

लोहार के एक वार से पहले
मैं रात को दफ़न करना चाहता हूँ,

मैं उस ताबूत की
आख़िरी कील बनना चाहता हूँ ।