सिर-सिर-सिर दखिना में सिहरै छै प्राण,
कमलोॅ के कोंढ़ी में ऐलै जुआनी
कुमारिये में लागलोॅ छै बीहा के पानी।
गँदला बिचारोॅ रं छँटलोॅ छै मेघ,
साधू के हिरदय रं निरमल आकाश
जुआनी रं बही गेलै अन्हर-बतास।
लाल-लाल आँखी के डोरोॅ छै,
मुहों केॅ दुक्खें ने लेने छै लुजगी
साँय बिना होलोॅ छै उजगी।
मिटै छै तहियैलोॅ लालो गुलाबोॅ के,
रंगोॅ-अबीरोॅ के भै रल्छै अंत
जीवन सें ढलै छै जीवन-वसन्त।