भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तिरकोण / कुमार अजय

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

म्हारै अर थारै
बिचाळै जियां
रैयौ वौ हरमेस

अर जियां रैयौ थूं ई
बिचाळै हर घड़ी
म्हारै अर वींरै

हां, बियां ई
रैयसूं म्है ई
थांरै अर वींरै
बिचाळै हर छिण
कीं तूटतौ-सौ
अर कीं तोड़तौ-सौ।