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तुम्हारा नाम लेकर प्राण का संचार करना है / रंजना वर्मा

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तुम्हारा नाम ले कर प्राण का संचार करना है।
रखे जिस हाल में हमको उसे स्वीकार करना है॥

पवन उन्चास चलते हैं तुम्हारे ही इशारे पर
तुम्हारा ही विरद है दूर दुख का भार करना है॥

तुम्हारे हाथ में हर जीव के प्राणों की है डोरी
हमें इस क्रूर यम के पाश को त्यौहार करना है॥

निमिष में सृष्टि रचते हो प्रलय करते हो पल भर में
सृजन की दृष्टि का हमको तनिक मनुहार करना है॥

तुम्हारे ही भरोसे हैं चले आये तुम्हारे दर
हमारे पाप संकुल को तुम्हें ही क्षार करना है॥

चले आओ कन्हैया साँवरे करुणा लिये अपनी
तुम्हारे प्रेम-पुष्पों से हमें शृंगार करना है॥

अभी 'मैं' 'पर' के बंधन बांध कर हम जी रहे जग में
सदय निज भावनाओं का अभी विस्तार करना है॥