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तुम्हारे मिलने का मतलब / मदन गोपाल लढा
Kavita Kosh से
पहली नज़र में
तुम्हारे लिए
मेरे हृदय में
जन्मी एक चाह
कैसे ही हो
तुमसे जान-पहचान।
कैसी मुलाकात है यह
ओ मेरी जोगन !
ज्यों-ज्यों
मैं जानता हूँ तुमको
खुद को भूलता हूं
अंतर की अन्धेरी सुरंग में
उतरता हूँ।
सच बताओ !
तुम्हारे मिलने का मतलब
कहीं मेरा खोना तो नहीं है।
मूल राजस्थानी से अनुवाद : स्वयं कवि द्वारा