तुम नीके दुहि जानत गैया.
चलिए कुंवर रसिक मनमोहन लागौ तिहारे पैयाँ.
तुमहि जानि करि कनक दोहनी घर तें पठई मैया.
निकटहि है यह खरिक हमारो,नागर लेहूँ बलैया.
देखियत परम सुदेस लरिकई चित चहुँटयो सुंदरैया.
कुम्भनदास प्रभु मानि लई रति गिरि-गोबरधन रैया.
तुम नीके दुहि जानत गैया.
चलिए कुंवर रसिक मनमोहन लागौ तिहारे पैयाँ.
तुमहि जानि करि कनक दोहनी घर तें पठई मैया.
निकटहि है यह खरिक हमारो,नागर लेहूँ बलैया.
देखियत परम सुदेस लरिकई चित चहुँटयो सुंदरैया.
कुम्भनदास प्रभु मानि लई रति गिरि-गोबरधन रैया.