भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तुम मुझे जो खुला एक आकाश दो / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चाँदनी की नदी में नहाऊँ कभी,
बादलों की पतंगें उड़ाऊँ कभी,
तुम मुझे जो खुला एक आकाश दो
तो परिन्दे-सा उड़कर दिखाऊँ अभी ।

फूलों पर नाचती तितलियाँ देख कर,
मेरा मन जा रहा हाथों से छूट कर,
सोचता हूँ हवाओं के कंधे पर चढ़
सारी दुनिया का चक्कर लगाऊँ कभी ।

एक सपना था कल रात आया मुझे,
पर्वतों ने हो जैसे बुलाया मुझे,
दोस्त हों मेरी जो बर्फ़ की चोटियाँ
लौटकर अपने घर फिर न आऊँ कभी ।

ख़ूबसूरत है दुनिया ये कहते हैं सब,
चैन से पर कहाँ इसमें रहते हैं सब,
एक पल की भी फुरसत किसी को नहीं
मन की बातें ये किसको सुनाऊँ अभी ?