पर्वत के शिखरों पर उतरी
तुम सर्दी की धूप
परस तुम्हारा पाकर निखरा
शीतल हिम का रूप।
शुभ्र चाँदनी तुम आँगन की
हँसते तुमसे द्वार ।
तरुवर की तुम लता सुहानी
लिपटी बनकर प्यार ।
पर्वत के शिखरों पर उतरी
तुम सर्दी की धूप
परस तुम्हारा पाकर निखरा
शीतल हिम का रूप।
शुभ्र चाँदनी तुम आँगन की
हँसते तुमसे द्वार ।
तरुवर की तुम लता सुहानी
लिपटी बनकर प्यार ।