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तूँ का कहबऽ हम जानऽ ही / शेष आनन्द मधुकर

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तूँ का कहबऽ हम जानऽ ही

तूँ का कहबऽ हम जाऽ ही।
हम बड़ा विचित्तर ही पुरबऽ ही,
जे भी मन में ठानऽही।

तूँ आव हऽ अंधड़ जइसन आउ बात करऽ हऽ पानी के,
बूढ़ा हो गेलऽ पर तोहर टूटल न दाँत जवानी के।
हमरा भरमयल तीस साल, वादा कयलऽ आउ तार देल,
अपने कुर्सी हथिया लेलऽ हमरा जीते जी मार देलऽ।

तोरे गुनवाँ तो शाम सुबह,
आपस में रोज बखानऽ ही।
तूँ का कहबऽ हम जानऽ ही।

वाहा तोहर सोना अइसन, करती जइसे कि पीतर हव,
नकली बतिया सब कह देहऽ असली बतिया सब भीतर हव।
बगबग उज्जर बगुला जइसन, ई तोहर कुरता धोती हव,
हमनी गरीब के सपना में, ई कपड़ा हीरा मोती हव।

हम लोर गिरावऽ ही अप्पन,
ओकर में सतुआ सानऽ ही।
तूँ का कहबऽ हम जानऽ ही।

तूँ सात पुश्त ला पाँच बरिस में, केत्ता पइसा जोड़ऽ हऽ,
कानून बना के तूँ अइसन हमनी के काहे फोड़ऽ हऽ।
सरकारी सेवा के लालच, सरकारी अदमी बनवे ला,
हमरे हथवा के ऊँच नीच कह के तूँ काहे तोड़ऽ हऽ।

तूँ मन से बड़ा कसइया हऽ,
खूबे तोरा पहचानऽ ही।
तूँ का कहबऽ हम जानऽ ही।

बिजुरी देबो, पानी देबो, हम पक्की सड़क बना देबो
ई न कहलऽ हम जिनगी के भी पूरा नरक बना देबो।
गेहूँ मिलतो, चीनी मिलतो, मरबऽ तऽ पानी भी मिलतो,
हमरा जइसन तोरा दुनिया में कोई न दानी भी मिलतो।

खटिया जइसन ओलहल अदमी,
के हम ओरदइयाँ तानऽ ही।
तूँ का कहबऽ हम जानऽ ही।

तूँ रौंद हऽ सपना हम्मर आउ, सपना रोज देखावऽ हऽ,
हम तोहर सुख ला मर गेली, तूँ हमरे रोज रोवाअऽ हऽ।
तूँ जोंक नियन जब पकड़ऽ हऽ, हहकार मचा दे हऽ सगरो।
सूतल अदमी पर आग फेंक के, तूँ ओकरा बमकावऽ हऽ,

केतनो ढरकावऽ लोर मगर,
तोरा पिशाच हम मानऽही।
तूँ का कहबऽ हम जानऽ ही।