तोहिं डगर चलत का भयोरी बीर,
कं पग की पायल कं सिर को चीर,
भई बावरी न कुछ सुध बुध शरीर॥
तेरे मतवारन सम झूमत नयन,
मुख भाषत है तू अति विरह के बयन
मानो घायल का ने कीन्हीं दृगन तीर॥
तोहिं डगर चलत का भयोरी बीर,
कं पग की पायल कं सिर को चीर,
भई बावरी न कुछ सुध बुध शरीर॥
तेरे मतवारन सम झूमत नयन,
मुख भाषत है तू अति विरह के बयन
मानो घायल का ने कीन्हीं दृगन तीर॥