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थम-थम-थम / शकुंतला सिरोठिया

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निंदिया रानी थम-थम-थम!
खिली केतकी, खिली चमेली,
बेला गमका गम-गम-गम!
कहां चली ओ निंदिया प्यारी,
थोड़ा-सा तो थम-थम-थम!
काले-काले मेघ घिरे हैं,
पानी बरसा झम-झम-झम!
अम्मां सुला रही है लेकिन,
बेटू करता है ऊधम।
कहां जा रही निंदिया रानी,
बस थोड़ा-सा थम-थम-थम!