भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

थम-थम-थम / शकुंतला सिरोठिया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


निंदिया रानी थम-थम-थम!
खिली केतकी, खिली चमेली,
बेला गमका गम-गम-गम!
कहां चली ओ निंदिया प्यारी,
थोड़ा-सा तो थम-थम-थम!
काले-काले मेघ घिरे हैं,
पानी बरसा झम-झम-झम!
अम्मां सुला रही है लेकिन,
बेटू करता है ऊधम।
कहां जा रही निंदिया रानी,
बस थोड़ा-सा थम-थम-थम!