भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

थांरी ओळयूं / आशा पांडे ओझा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

घणी लुभावणी लागै
इण जूण मरूथल री
सुळगती परसां में
कदै-कदास
बिरखा री बूंद ज्यूं
छानै-छुरकै
छिण-दो छिण
जद कदै
आय मिलै
म्हां सूं
थांरी ओळयूं
नस-नस में
रम जावै जद
जाणै कितरा ई
सावण।