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दरवाजा पे नौबत बाजे / मालवी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

दरवाजा पे नौबत बाजे
लाल म्हारे भोत नीको लागे
दाई हमारे मन भावे
आवतो सो दीनड़ झेले
लाल म्हारे भोत नीको लागे
सासू हमारा मन भावे
वे कुंवर पठोला में झेले
वे जोठाणी हमारे मन भावे
वे चखेते फूंको धरावे
लाल मोय भोत नीको लागे
वे देराणी हमारे मन भावे
वे दस दन रसोई निपाये
वे कोणा में खाट बिछावे
लाल मोय भोत नीको लागे
वे नणंद हमारे मन भावे
वे कंवळे ते सांतीपूड़ा लावे
वे पड़ोसन हमारे मन भावे
वे दस दिन मंगल गावे
वे ढोली हमारे मन भावे
वे अँगना में ढ़ोल घोरावे
वे जोसी हमारे मन भावे
वे ललना को नाम धरावे।