भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

दही-बड़ा / श्रीप्रसाद

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सारे चूहों ने मिल-जुलकर
एक बनाया दही-बड़ा,
सत्तर किलो दही मँगाया
फिर छुड़वाया दही-बड़ा!
दिन भर रहा दही के अंदर
बहुत बड़ा वह दही-बड़ा,
फिर चूहों ने उसे उठाकर
दरवाजे से किया खड़ा।
रात और दिन दही बड़ा ही
अब सब चूहे खाते हैं,
मौज मनाते गाना गाते
कहीं न घर से जाते हैं!