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दिया-बत्ती हुओ रे मिलाप बय लड़ी सांजुली / निमाड़ी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

दिया-बत्ती हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।
गौआ-बछुआ हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।
पंछी-बच्चा हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।
रात-दिन हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।
राजा-रानी हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।