भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

दिल रहौ दाबनी में बसकें / ईसुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दिल रहौ दाबनी में बसकें,
मों फेरों इतखाँ तुम हँसकें।
झँझरीदार खुली ज्यों पुतरी
पटियन बीच रई लसकें।
दोई भोंय दाब कें बैठी
कानन लों खेंचें कसकें।
ईसुर प्रान कौन के लेतीं?
राधा के माथै धसके।