भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

दिल साफ़ नहीं है मैं इबादत न करूँगा / ओम प्रकाश नदीम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दिल साफ़ नहीं है मैं इबादत न करूँगा ।
धोका दूँ ख़ुदा को ये जसारत[1] न करूँगा ।

तूफाँ की क़यादत[2] करूँ कश्ती भी बचाऊँ,
ये मुझसे न होगा मैं सियासत न करूँगा ।

चाहे मेरी आवाज़ का कुछ भी न असर हो,
चुप रह के सितमगर की हिमायत न करूँगा ।

तुम अपनी रिवायात न तब्दील करोगे,
मैं अपने उसूलों से बग़ावत न करूँगा ।

ऐ इत्र के ताजिर ! तेरे बिज़नेस के लिए मैं,
गुलशन के गुलाबों की तिजारत[3] न करूँगा ।

शब्दार्थ
  1. दुस्साहस
  2. नेतृत्व
  3. व्यापार