नदी में किसी की छाया है
आकाश में एक उड़ा आंचल
पेड़ों पर टंगा है कोई रंग
दिशाओं में कोई आवाज़
मैं तुम्हें
भूल क्यों नहीं पाता?
नदी में किसी की छाया है
आकाश में एक उड़ा आंचल
पेड़ों पर टंगा है कोई रंग
दिशाओं में कोई आवाज़
मैं तुम्हें
भूल क्यों नहीं पाता?