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दिसम्बर / उत्पल डेका / नीरेन्द्र नाथ ठाकुरिया

सितारे इस बारे में बात करते हैं
चाँदनी के सपने देखते हैं
 
यरूशलेम की स्वप्निल - संध्या में
मरियम सितारों का इन्तज़ार करती रहती है
 
अब दिसम्बर आ गया है
सर्दियों के कोहरे को चीरते हुए
ठण्डी हवा के झोंके
दिल को कँपकँपा देते हैं
खासी पहाड़ियों पर
 
शान्ति की रोशनी और प्रेम के गीत
मुझे सलीब पर चढ़ाए गए
पेड़ों की ओर ले जाते हैं
सान्ताक्लॉज़ मुझे देखकर हाथ हिलाते हैं
और कहते हैं — मैरी क्रिसमस

मूल असमिया भाषा से अनुवाद : नीरेन्द्र नाथ ठाकुरिया