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दीन दुखियों के लिए ईश्वर से प्रार्थना / मुंशी रहमान खान

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ईश जीव में भेद यह जिव माया लपटान।
माया ईश न मोहई मायापति भगवान।। 1

ईश जीव से है बड़ा कर उसको परनाम।
हाथ जोरि विनती करहुँ छोड़ मोह मद काम।। 2

सुख दुख दोनहुँ बंधु हैं हैं ईश्‍वर अधीन।
देवहिं ईश्‍वर कर्म फल जो जस करनी कीन।। 3

हे जग करता सब दुख हरता तुम जग पालनहार।
किसी को अति सुख दीन्‍ह तुम किसी को दुख अपार।। 4

सुखियन को दुख में करत दुखियन को सुख देहु।
यह सब प्रभुता आप में तौ हमारि सुनि लेहु।। 5

है दीनन की विनय यह सुनिए दीनदयाल।
काटहु दुख जग दुखिन का जिन कृपाण कराल।। 6

है अपराधी तोर सब भूल कीन्‍ह तन पाय।
क्षमहु नाथ अपराध सब तुम बिनु कौन सहाय।। 7

तोर दीन्‍ह दुख तुम हरहु दुख नाशक तुव नाम।
लाख राज निज नाम की यही विनय वसु याम।। 8

सुखियन को यह उचित है लख दुखियन कर हाल।।
बनें सहायक दुखिन कर देकर धन तत्‍काल।। 9

है दुख सागर अगम यह तुम केवट बलवान।
पार करहुँ प्रभु दुखिन को तुव आशा रहमान।। 10