दीप को दिनमान किया जाए
मौन को स्वरवान किया जाए
ज़िन्दगी इक खिलौना है इस पर
क्या ख़ाक अभिमान किया जाए
ज़रूरी है कि ईश्वर से पहले
किसी दीन का ध्यान किया जाए
बहुत हो चुका झूठ का अभिनन्दन
अब सत्य का सम्मान किया जाए
किसी की याद में रोने की जगह
ताज-सा एक निर्माण किया जाए