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दीवाली का गीत / रमेश रंजक

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धरती पर दीप जले, अम्बर में तारे ।
                    दीवाली आई द्वारे ।।

मन्दिर में दूर आरती थमी
कुहरे की एक पर्त-सी जमी
देखना ! अन्धेरे से रोशनी न हारे ।
                    दीवाली आई द्वारे ।।

आँगन में दीप डोलने लगे
सोने का रंग घोलने लगे
एक नया भोर उगा साँझ के किनारे ।
                    दीवाली आई द्वारे ।।

कहीं जली पुलक-पुलक फुलझड़ी
बम छूटे, सर-सर चकई उड़ी
चन्द छन्द बोल गए दूधिया अँगारे ।
                    दीवाली आई द्वारे ।।

आओ हम बैर-भाव तोड़कर
मिल जाएँ राह-द्वेष छोड़कर
जलते हैं दीप सदा, स्नेह के सहारे ।
                    दीवाली आई द्वारे ।।