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दीवा बले सारी रात, मेरया जाल्मा / पंजाबी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

दीवा बले सारी रात, मेरया जाल्मा

दीवा बले सारी रात ।

बत्तियाँ बटा रखदी, मेरया जाल्मा

दीवा बले सारी रात ।

आवेंगा ताँ पुच्छ लवांगी, मेरया जाल्मा

कित्थे गुज़ारी सारी रात ।

बत्तियाँ बटा रखदी, मेरया जाल्मा

दीवा बले सारी रात ।

आवेंगा ताँ बुज्झ लवांगी, मेरया जाल्मा

कित्थे गुज़ारी सारी रात ।

दीवा बले सारी रात, मेरया जाल्मा

दीवा बले सारी रात


भावार्थ


--' दीया रात भर जलता है, ओ मेरे ज़ालिम ! दीया रात भर जलता है । बत्तियाँ तैयार करा कर रखती हूँ, ओ

मेरे ज़ालिम ! दीया सारी रात जलता रहता है । तू आयेगा तो मैं पूछ लूंगी, ओ मेरे ज़ालिम ! कहाँ बिताई सारी

रात ? बत्तियाँ तैयार करा कर रखती हूँ, ओ मेरे ज़ालिम ! दीया सारी रात जलता रहता है । तू आयेगा तो मैं

समझ जाऊंगी, ओ मेरे ज़ालिम ! कहाँ बिताई सारी रात ? यह दीया रात भर जलता है, ओ मेरे ज़ालिम !

दीया सारी रात जलता रहता है ।