भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

दुइ टूक बात / पढ़ीस

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चहयि होटल मा जलपानु करउ की-
अॅचारू विचारू की पोथी पढ़उ
व्यभिचारी रहउ सदाचारी बनउ चहयि-
साँच्यन ग्वाड़न मूड़ चढ़उ।
चाहे राजा भलयि, रय्यति हे चहयि-
जायि जहाजन म्याड़ चढ़उ।
मुलउ द्यास[1] जवार[2] की बातन मा-
घर ते तुम दादा न पाछे कढ़उ।
तुम हॉथन ग्वाड़न ते मजबूत यी-
चारि पनेथी कि बासी करउ।
को सगा हयि सही सउत्यालि हयि-
तो तनि भाई भले पहिंचानउ तउ।
किहि की अमरउती रही जग मा चहयि-
आजु जरउ चहयि काल्हि मरउ।
कटि जाउ न द्यास की बातन मा तउ-
अकारथ का युहु जामा धरउ।

शब्दार्थ
  1. द्यास, देश
  2. आस-पास का क्षेत्र विशेष